Saturday, 22 June 2013

Yeh Safar..

Everytime I feel low, I sing this song to myself. And it does give me respite!

दिल ना-उम्मीद तो नहीं
ना-काम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम
मगर शाम ही तो है
~~~ * ~~~

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
न उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सितम की रात है ढलने को
है अँधेरा ग़म का पिघलने को
ज़रा देर इसमें लगे अगर
न उदास हो मेरे हमसफ़र

नहीं रहने वाली ये मुश्किलें
की है अगले मोड़ पे मंजिलें
मेरी बात का तू यकीन कर
न उदास हो मेरे हमसफ़र

कभी ढूंढ लेगा ये कारवां
वो नई ज़मीन नया आसमां
जिसे ढूंढती है तेरी नज़र
न उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
न उदास हो मेरे हमसफ़र

~ जावेद अख्तर